• सीबीआई ने सोमवार को कहा कि भारतीयों ने 500 अरब अमेरिकी डालर (करीब 24.5 लाख करोड़ रुपए) विदेशी बैंकों में छिपा रखा है।

    सीबीआई निदेशक एपी सिंह ने आज यहां भ्रष्टाचार निरोधी तथा सम्पत्ति वसूली पर पहले इंटरपोल वैश्विक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्विस बैंकों में सबसे बड़े धन जमाकर्ता भी कथित रूप से भारतीय हैं।

    सिंह ने विदेशों में छिपाए गए अवैध धन के आकलन का स्रोत इंगित किए बगैर कहा कि मॉरीशस, स्विट्जरलैन्ड, लिस्टेनस्टीन, ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह जैसी कर अपवंचना की पनाहगाह के रूप में मशहूर जगहों में पहुंचने वाले अवैध धन से सबसे अधिक नुकसान भारत को पहुंचा है।

    सीबीआई निदेशक ने कहा कि यह आकलन किया गया है कि भारतीयों का करीब 500 अरब डॉलर अवैध धन ऐसे देशों में जमा है, जो कर अपवंचकों की पनाहगाह के रूप में जाने जाते हैं। स्विस बैंकों में सबसे अधिक धन जमा करने वाले भी भारतीय हैं। 

    विदेशों में छिपाए गए भारतीय काले धन के बारे में 500 अरब डॉलर से लेकर 1500 अरब डॉलर तक विभिन्न आकलन हैं। सरकार का कहना है कि किसी अवैध गतिविधि का कोई आधिकारिक आकलन नहीं हो सकता। वह कहती है कि ये आंकड़े गैर प्रमाणीकृत अवधारणाओं पर आधारित हैं। एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन ‘ग्लोबल फिनांशियल इंटेग्रिटी’ ने आकलन किया था कि भारतीयों ने 25 लाख करोड़ रुपए अवैध रूप से विदेशों में छिपा रखा है।

    आज का सीबीआई निदेशक का वक्तव्य इस मायने में अहम है कि पहली बार भारत में प्राधिकार वाले किसी व्यक्ति ने काले धन का एक आकलन पेश किया है, जिसे विदेशों में छिपाकर रखा गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसे अवैध धन के लेनदेन के बारे में सूचना हासिल करने में वक्त लगता है क्योंकि जिन देशों में यह धन जमा है, वहां न्यायिक अनुरोध भेजकर जांचकर्ताओं को परत दर परत खंगालना पड़ता है।

    सिंह ने कहा कि ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की सूची में ऐसे 53 प्रतिशत देशों को कम भ्रष्ट बताया गया है, जहां भ्रष्टाचार से अर्जित अधिकांश धन जाता है। इनमें न्यूजीलैंड सबसे कम भ्रष्ट देश है, जबकि सूची में सिंगापुर का पांचवा तथा स्विट्जरलैंड का सातवां स्थान है।

    सीबीआई निदेशक ने कहा कि जिन देशों में अवैध धन पहुंचता है, उनमें सूचना देने के प्रति राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है क्योंकि उन्हें पता है कि उनकी अर्थव्यवस्था किस हद तक गरीब देशों से आने वाले इस अवैध धन पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि चुराई गई सम्पत्ति का पता लगाना, उस पर रोक लगाना जब्त करना तथा वापस लाना एक कानूनी चुनौती और एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए दक्षता एवं राजनीतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है।

    सिंह ने कहा कि सम्पत्ति वसूली की जांच एक जटिल, समय लेने वाली खर्चीली प्रक्रिया है, जिसके लिए दक्षता और राजनीतिक इच्छा शक्ति की जरूरत है। सम्पत्ति वसूली में काफी बाधाएं हैं। सीबीआई निदेशक ने कहा कि यह न केवल एक विशेष कानूनी प्रक्रिया है, जो विलंब और अनिश्चितता से जुडी है बल्कि इसमें भाषा संबंधी बाधाएं हैं और अन्य देशों के साथ काम करते समय विश्वास की कमी भी शामिल है।

    उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजार धन के तेजी से प्रवाह में मदद करते हैं और ऐसे मामलों में धन का पता लगाने में और दिक्कत करते हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी अपने लाभ के लिए जांच एजेंसियों के क्षेत्रीय मुद्दों का इस्तेमाल कर अपने अपराधों को कम से कम दो देशों में फैला रहे हैं और तीसरे में निवेश कर रहे हैं।

    सीबीआई निदेशक ने कहा कि 2जी सीडब्ल्यूजी और मधु कोड़ा जैसे जिन कुछ महत्वपूर्ण मामलों की सीबीआई ने हाल में जांच की, उनमें हमने पाया कि धन दुबई, सिंगापुर या मॉरीशस गया, जहां से यह स्विट्जरलैंड और कर चोरों की पनाहगाह मान जाने वाले अन्य देशों में पहुंचा। उन्होंने कहा कि अपराधी कुछ छद्म कंपनियां खोलते हैं और चंद घंटों में एक के बाद एक कई खातों में धन हस्तांतरित किया जाता है क्योंकि बैंकिग लेन-देन में देशों की सीमाएं कोई बाधा नहीं है।

    सिंह ने कहा कि विश्वबैंक का अनुमान है कि आपराधिक गतिविधियों और कर अपवंचन से करीब 1500 अरब डॉलर एक देश से दूसरे देशों में पहुंचता है, जिसमें से 40 अरब डॉलर विकासशील देशों में सरकारी कर्मचारियों को दी गई रिश्वत का भाग है। सिंह ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पांच साल के दौरान इसमें से केवल पांच अरब अमेरिकी डॉलर वापस लाया जा सका है।

    Posted by jabalpurguide @ 11:26 AM

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